मानवेंद्र सिंह और हरीश चौधरी के पेंच में उलझी थार की रणनीति

दरअसल, बाड़मेर-जैसलमेर की 8 सीटों पर पूर्व सांसद हरीश चौधरी अपनी अहम भूमिका निभा रहे थे. लेकिन मानवेंद्र सिंह की एंट्री ने चौधरी के प्रभाव को कम कर दिया है. ऐसे में दोनों नेता अपने अपने समर्थकों के लिए दिल्ली के चौखट पर उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं.

रूपाराम मेघवाल, हरीश चौधरी के करीबी

जैसलमेर विधानसभा सीट राजपूत बाहुल्य क्षेत्र है. भाजपा हमेशा से जैसलमेर विधानसभा सीट पर राजपूत प्रत्याशी मैदान में उतार रही है. वहीं कांग्रेस ने 2013 में रूपाराम मेघवाल को प्रत्याशी बनाया था. मोदी लहर के बाजवूद रूपाराम महज दो हजार मतों से पराजित हुए थे. ऐसे में उनकी प्रबल दावेदारी स्वाभाविक है. वहीं रूपाराम धणदै पूर्व सांसद हरीष चैधरी के खास माने जाते हैं. पिछले चुनावों में भी हरीश चैधरी ने ही रूपाराम मेघवाल की जमकर पैरवी की थी. वहीं इस चुनावों में मुस्लिम-मेघवाल गठबंधन को देखते हुए प्रभावशाली उम्मीदवार माने जा रहे हैं. रूपाराम मेघवाल और उनकी पुत्री अंजना मेघवाल लगातार पिछले पांच साल से फील्ड में सक्रिय हैं.

राजपूत समाज को टिकट देने की मांग

उधर, राजपूत बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण राजपूत समाज भी कांग्रेस कि तरफ से टिकट पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है. विधानसभा चुनाव 2008 में महज तीन हजार मतों से पराजित होने वाली सुनीता भाटी प्रबल दावेदार हैं. सुनीता भाटी भी लगातार राजनीति और फील्ड में सक्रिय हैं. वहीं सामान्य सीट होने के कारण राजपूत समाज सामान्य वर्ग को टिकट आवंटन की मांग कर रहा है.
ऐसे में मानवेंद्र सिंह की एंट्री के बाद सुनीता भाटी का भी पलड़ा भारी नजर आ रहा है. मानवेन्द्रसिंह की स्वाभिमान रैली में सुनीता भाटी ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर जनता को संबोधित भी किया था. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मानवेन्द्रसिंह उनकी पैरवी कर सकते हैं. राजपूत समाज अब मानवेन्द्रसिंह से राजपूत प्रत्याशी को टिकट आवंटन की मांग कर रहा है. वहीं राजपूत समाज का कांग्रेस से जुड़ाव होने के बाद जैसलमेर विधानसभा सीट पर राजपूत प्रत्याशी मजबूत नजर आ रहा है.

राजनीतिक अखाड़े में किसको मिलती है पटखनी
राजनीति के मैदान में भाग्य आजमाने उतरी पूर्व महारानी रासेश्वरी राज्यलक्ष्मी भी कांग्रेस से प्रबल दावेदार हैं. दिल्ली के कांग्रेस कार्यालय में उनकी आवाजाही चर्चा का विषय बनी हुई है. मानवेन्द्रसिंह की भी राज परिवार से नजदीकियों के चलते पूर्व महारानी की दावेदारी भी प्रबल मानी जा रही है. अब देखने वाली बात ये होगी कि जैसलमेर विधानसभा सीट आवंटन में मानवेन्द्रसिंह और हरीश चौधरी में कौन पासे की बाजी मारता है.