भाजपा में टिकट को लेकर कई जगह लठ्म-लट्ठा शुरू, प्रभारी खन्ना ने MLA को कहा Get OUT

जयपुर . चुनाव के रण में राजनीतिक दलों के बीच जहां सत्ता की जंग तेज हो चुकी है. वहीं, टिकट की मारामारी कांग्रेस के साथ ही भाजपा के भीतर भी बढ़ने लगी है. चुनाव की तरीख के ऐलान के साथ ही टिकट की भागदौड़ के बीच भाजपा के अंदर भी नोंक-झोक के साथ ही विरोधियों के सुर मुखर होने लगे हैं. हालात यह है कि चाकसू विधायक खुद प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना से उलझ पड़े. जिस पर खन्ना ने एमएलए को कार्यक्रम से बाहर जाने के निर्देश दे दिए.
सत्ता तक पहुंचने  को लेकर भाजपा-कांग्रेस सधी रणनीति बनाते हुए  आगे बढ़ रही हैं. एक-दूसरे को चुनावी मात देने के लिए दांव आजमा रहे इन दलों के भीतर टिकट को लेकर भी आवाजें तेज हो रही हैं. कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर पहले से मारामारी जारी है. वहीं, अब भाजपा के भीतर भी शोर शुरू होने लगा है. हाल में दो विधायकों के खिलाफ विरोध सामने आ चुका है. जिसके बाद से पार्टी पदाधिकारी सतर्क हो गए हैं. पहला मामला जयपुर ग्रमीण क्षेत्र की चाकसू सीट से सामने आया है. चुनाव से पहले यहां के सियासी हालात के बारे में जानने पहुंचे केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल व प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना के सामने स्थानीय विधायक लक्ष्मीनारायण बैरवा के विरोध में नारेबाजी होने लगी.
प्रभारी खन्ना के सामने ही विधायक के समर्थक और विरोधी आपस में भिड़ गए. विरोधी लगातार ‘लक्ष्मीनारायण बैरवा भगाओ और चाकसू बचाओ’ के नारे लगाए. इस पर बैरवा भी उखड़ गए. इस दौरान विधायक प्रदेश प्रभारी अविनाश राय से भी उलझ गए. जिस पर खन्ना ने तल्खी दिखाते हुए विधायक को कार्यक्रम से गेट आउट कर दिया . वहीं, दूसरा मामला नागौर जिले से विधायक सुखाराम नेतड़िया के खिलाफ भी नाराज कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है. नाराज कार्यकर्ताओं ने बैठक  करके विधायक को चुनाव में टिकट नहीं देने की मांग की है. बताया जा रहा है कि वहां कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी है. प्रत्याशियों को लेकर अंदरखाने चल रहे मंथन के बीच मैदान में मुखर हो रहे विरोध के बाद पार्टी आलाकमान सतर्क हो गए हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई सीटों पर अंदरखाने विरोध की स्थिति बनती जा रही है. इस विरोध के पीछे प्रमुख रूप से कार्यकर्ताओं की नाराजगी मुख्य है.
आपको बता दें कि उपचुनाव के परिणाम के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है. कई बार बैठकों और फीडबैक के दौरान कार्यकर्ता सांसद और विधायकों पर उपेक्षा करने का आरोप भी लगा चुके हैं. इसके बाद से पार्टी के बड़े पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के रोष को कम करने के लिए तमाम जतन कर रहे हैं. लेकिन, चुनाव से पहले सामने आ रहे कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए सियासी रूप से माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. कई सीटों पर कार्यकर्ता विधायकों के कामकाज को लेकर खासे नाराज हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी स्तर पर प्रत्याशियों के चयन में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.