हार की हताशा में कांग्रेस का आत्मघाती निर्णय

कांग्रेस के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकता है न्यूज़ चैनलों की डिबेट से दूरी

-निरंजन परिहार

न्यूज़ चैनलों की डिबेट से अपने प्रवक्ताओं और न्यूज़ पैनलिस्ट को पूरे एक महीने तक दूरी बनाए रखने का निर्णय कांग्रेस के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। महीने भर में तो बहुत कुछ बदल जाता है। और अगर सचमुच बदल गया तो कांग्रेस की जो बची खुची जगह है, वह भी किसी और की हो जाएगी। वक्त और खाली स्थान वैसे भी किसी की प्रतीक्षा नहीं करते। दरअसल, मीडिया को तो दोनों पक्ष चाहिए। समर्थन में भी और विरोध में भी। अगर विरोधी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस विरोध करना पूरे एक महीने भर के लिए छोड़ देगी, तो  विरोध कोई और करेगा। और जो करेगा, वही कांग्रेस की खाली जगह को भी भरेगा

हमारे मीडिया को तो अपनी डिबेट में सरकार या शासक वर्ग के विपक्ष में सिर्फ बोलने के लिए कोई न कोई चाहिये। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कांग्रेस से है या किसी दूसरे मामूली दल से। और, वैसे भी इस देश में अच्छे चेहरे वाले  विरोधियों की ठेकेदारी कोई अकेले कांग्रेस की नहीं है। जमीन पर प्लॉट और मीडिया में स्लॉट कभी खाली नहीं रहते। हो सकता है, टीवी डिबेट को इस महीने भर के  दौरान कांग्रेस के मीम अफ़ज़लों, रागिनी नायकों, सुराजेवालाओं और ऐसे ही कुछ ऊटपटांग नामों के खिलाफ सामान्य दुनिया से कई बेहतरीन और शानदार  चेहरे मिल जाएं ! ईश्वर करे ऐसा ना हो, लेकिन ईश्वर आजकल अपने जैसे कांग्रेसियों की सुन कहां रहा है !!!

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