सुखाड़िया विवि के कुलपति और रजिस्ट्रार आमने-सामने

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उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में एलडीसी की भर्ती में कुलपति के गांव के छात्र को 75 में से 75 अंक आने की जांच में गुरुवार को तब बवाल हो गया, जब कुलपति ने पुलिस को दी गई रिपोर्ट में दिवंगत प्रोफेसर विजय श्रीमाली को काॅर्डिनेटर व काॅन्फिडेंशियल वर्क के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। इसके बाद श्रीमाली के परिजन, समाज के लोग, छात्रों सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान वीसी और रजिस्ट्रार भी आमने-सामने हो गए।

इस मामले में कुलपति जेपी शर्मा का कहना है कि उन्होंने सिर्फ इतना लिखा है कि काॅर्डिनेटर प्रो. विजय श्रीमाली थे। उन्होंने यह कहीं नहीं लिखा कि उन्होंने पेपर सेट किया। जबकि, रजिस्ट्रार एचएस भाटी ने कुलपति पर आरोप लगाया कि नोटिंग बाद में बदली गई और खुद को बचाने के लिए कुलपति ने दिवंगत प्रोफेसर पर आरोप मढ़ दिया। पुलिस ने पेपर सेटर का नाम मांगा था, कुलपति ने प्रिंटिंग प्रेस का नाम दिया और प्रो. विजय श्रीमाली नाम काॅन्फिडेंशियल वर्क दर्शाते हुए लिख दिया। इसी से कुलपति की मंशा सामने आती है।

दरअसल, इस मामले के गर्म होने के बाद खुद राज्यपाल ने इसकी जांच के आदेश दिए थे, जिस पर प्रतापनगर थाना पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल मामला थमा नहीं है और कुलपति का विरोध जारी है।

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उदयपुर में आयकर की कार्रवाई

नए साल में आयकर विभाग ने उदयपुर में खाता खोल दिया है। शुरुआत जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल से हुई, जहां से टीम ने 1.1 करोड़ रुपये की अघोषित आय जब्त की है।

गुरुवार को आयकर टीम ने राजावत और मुर्डिया ज्वैलर्स पर भी कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई आयकर विभाग की इनवेस्टिगेशन विंग के संयुक्त निदेशक एम. रघुवीर के निर्देशन में चल रही है। जीबीएच अमेरिकन हॉस्पिटल में आयकर टीम ने बुधवार को छापा मारा था। टीम ने 1.1 करोड़ की नकदी बरामद की और दस्तावेज खंगाले। जीबीएच अमेरिकन पर कार्रवाई बुधवार देर शाम तक पूरी हुई। इसके अगले दिन गुरुवार सुबह टीम ने राजावत ज्वैलर्स और मुर्डिया ज्वैलर्स के शोरूम सहित अन्य ठिकानों पर छापे की कार्रवाई शुरू की है। कार्रवाई खबर लिखने तक जारी थी। यहां से भी अघोषित संपत्ति का खुलासा हो सकता है। फिलहाल अधिकृत जानकारी सामने नहीं आई है।

पुलिस वारंट का टिकट यात्री को दे वसूला किराया

 रोडवेज के एक परिचालक ने एक यात्री को पुलिस वारंट का टिकट देकर किराए के पैसे ऐंठ लिए। टिकट पर पुलिस वारंट अंकित देख यात्री को शंका हुई और उसने रोडवेज अधिकारी को शिकायत की। इस पर परिचालक की पोल खुल गई और अन्य यात्रियों को भी यह समझ में आ गया कि टिकट लेने के बाद भी एक बार उसे पूरी तरह पढ़ लिया जाए, कहीं उनके साथ भी ठगी तो नहीं हो रही।
जानकारी के अनुसार यात्री गुरुवार को चित्तौडग़ढ़ से उदयपुर के लिए बैठा था। रोडवेज की बस चित्तौडग़ढ़ आगार की थी। इस बीच जब यात्री ने टिकट ध्यान से देखा तो उसे टिकट पर 2 जनवरी की तारीख और पुलिस वारंट अंकित नजर आया। यात्री ने पड़ोसी यात्री के टिकट को देखा तो उस पर ऐसा कुछ नहीं लिखा था। यात्री ने परिचालक से चर्चा की तब जवाब में आनाकानी पर उसकी शंका बढ़ गई और उसने शिकायत की। उदयपुर आगार के अधिकारियों ने जब जांच की तो यात्री की शिकायत सही मिली। दरअसल, परिचालक ने पुलिस वारंट पर टिकट निकालने के बाद वह टिकट संबंधित पुलिसकर्मी को नहीं दिया था। उसी टिकट को उसने इस यात्री को दे दिया और उससे किराया ले लिया, जबकि पुलिस वारंट पर निकाले गए टिकट का भुगतान सरकार रोडवेज को करती है।
उदयपुर आगार के मुख्य प्रबंधक महेश उपाध्याय ने आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रकरण को परिचालक से संबंधित चित्तौडग़ढ़ आगार के प्रबंधक को भिजवा दिया। उपाध्याय ने बताया कि परिचालक और बस चित्तौडग़ढ़ आगार के हैं, ऐसे में जो भी कार्रवाई होगी, वहीं से होगी।